उर्दू साहित्य में स्त्री-विमर्श: परंपरा से आधुनिकता तक — एक आलोचनात्मक अध्ययन
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स्त्री-विमर्श, उर्दू साहित्य, इस्मत चुग़ताई, क़ुर्रतुल ऐन हैदर, फ़हमीदा रियाज़, नारीवाद, प्रगतिशील साहित्य##article.abstract##
उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा में स्त्री-विमर्श एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और बहुआयामी विषय है। प्रस्तुत शोधपत्र उर्दू साहित्य में स्त्री की छवि, उसकी अभिव्यक्ति और उसके संघर्ष का ऐतिहासिक एवं आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह शोध इस तथ्य को रेखांकित करता है कि उर्दू साहित्य में स्त्री की उपस्थिति आरंभ से ही रही है किंतु उसकी भूमिका क्रमशः एक मूक पात्र से एक सशक्त वक्ता में रूपांतरित हुई है। शास्त्रीय उर्दू ग़ज़ल में माशूक़ा के रूप में स्त्री की आदर्शीकृत छवि से लेकर रशीद जहाँ, इस्मत चुग़ताई, क़ुर्रतुल ऐन हैदर, फ़हमीदा रियाज़ और किश्वर नाहीद जैसी लेखिकाओं की सशक्त और विद्रोही स्वर तक की यात्रा उर्दू साहित्य के इतिहास का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण अध्याय है। यह शोधपत्र उस पूरी यात्रा का विस्तृत और आलोचनात्मक विवेचन प्रस्तुत करता है।